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प्रेम रस - जागरण जंकशन

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मधुर वाणी का महत्त्व

Posted On: 21 Feb, 2011 में

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ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय॥

विचारों में चाहे विरोधाभास हो, आस्था में चाहे विभिन्नताएं हो परन्तु मनुष्य को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए कि बात के महत्त्व का पता चल सके।

किसी ने सही कहा है कि अहम् को छोड़ कर मधुरता से सुवचन बोलें जाएँ तो जीवन का सच्चा सुख मिलता है। कभी अंहकार में, तो कभी क्रोध और आवेश में कटु वाणी बोल कर हम अपनी वाणी को तो दूषित करते ही हैं, सामने वाले को कष्ट पहुंचाकर अपने लिए पाप भी बटोरते हैं, जो कि हमें शक्तिहीन ही बनाते हैं।

किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए व्यक्ति के व्यक्तित्व की निर्णायक भूमिका होती है और व्यक्तित्व विकास के लिए भाषा का बहुत महत्त्व होता है, परन्तु इसके साथ-साथ वाणी की मधुरता भी उतनी ही आवश्यक है।

बड़ो से हमेशा सुनते आएं हैं कि वह वाणी ही हैं जिससे मनुष्य के स्वाभाव का अंदाज़ा होता है। ईश्वर ने हमें धरती पर प्रेम फ़ैलाने के लिए भेजा है, और यही हर धर्म का सन्देश हैं। प्रेम की तो अजीब ही लीला है, प्रभु के अनुसार तो स्नेह बाँटने से प्रेम बढ़ता है…

अधिक पढने के लिए क्लिक करें:- 

http://www.premras.com/2010/03/blog-post_25.html



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sailesh के द्वारा
January 25, 2014

सुंदर विचार

rahulpriyadarshi के द्वारा
February 22, 2011

‘वाणी एक अमोल है,जो कोई बोलै जानि; हिये तराजू तौल के,तब मुख बाहर आनि.’ सार्थक रचना,आपको धन्यवाद.

राजीव तनेजा के द्वारा
February 22, 2011

सत्य वचन

charchit chittransh के द्वारा
February 22, 2011

शाहनवाज जी , बधाई ! स्वागत ! मीठी बोली ही बोली जानी चाहिए , जब विरोध प्रकट करना हो तब भी ! उत्तम विचार !

Amit Dehati के द्वारा
February 21, 2011

शाहनवाज जी स्वागत है आपका इस ब्लोगिंग की दुनिया में ….. वाह क्या बात है बहुत सुन्दर प्रस्तुति …..अच्छी रचना ! वह बाड़ी ही क्या जिससे प्यार का रश न टपके . पहली ही मुलाकात में, बाड़ी से ऐसा प्रतीत हो की जन्मों जन्म का बंधन है इनके साथ बधाई स्वीकारें ! http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/12/%E0%A4%AD




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